किसी का नंबर ढूंढते
उसके पुरानी ज़िन्दगी से रू-ब-रू हो बैठे
उन दिनों की याद आ गयी
जब,
डर था
शर्मिन्दिगी थी
दर्द था
मगर आवाज़ नहीं थी
लम्बा रस्ता तय किया हैं वहां से
उसने भी
मैंने भी
अब,
लब आज़ाद हैं
इरादा है
हिम्मत है
तुम वहां चलो, मैं यहाँ
आखिर मंजिल तो एक ही है!
Saturday, February 18, 2012
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